अमेरिका का असली चेहरा – जिसे कोई नहीं जानता

The Green Book - Humanity College
Source: BlackEnterprise.com

जातिवाद, ईशनिंदा और रंगभेद- जिन्हे भारत के निवासियों ने भी बड़ी जल्दी अपना लिया है

हाल ही में मैं ‘ ग्रीन बुक’ नामक एक अंग्रेजी फिल्म देखने गया था। कहानी इस प्रकार है :

डॉक्टर डॉन शर्ले एक अफ्रीकन-अमेरिकन क्लासिकल पियानिस्ट हैं, जिनके दोस्तों के लिस्ट में उस वक्त के मशहूर अटॉर्नी जनरल रॉबर्ट केनेडी जैसे लोग शामिल हैं। डॉक्टर शर्ले न्यू यॉर्क से अमेरिका के डीप साउथ में कॉन्सर्ट टूर पर जाना चाहते हैं और इस दौरान उनकी मुलाकात होती हैं इटली के एक श्वेत बार बाउंसर से जो बाद में एक ड्राइवर और अंगरक्षक बन जाता है। ये मुलाकात दोस्ती में बदल जाती हैं और वे वीनस के टूर पर निकल पड़ते हैं।

यह फिल्म एक श्वेत और अश्वेत, दो इंसानों के बीच रिश्ते की कहानी है। पर्दे पर अमेरिका के उस समय को दर्शाया गया है जब समाज में सामाजिक-आर्थिक भेदभाव और रंगभेद जैसी चीजें पनपी हुई थीं। प्रसिद्ध  संगीतकार होने के बावजूद, डॉक्टर शर्ले को केवल एक अश्वेत होने के कारण, उनके इंडिआना से केंटकी और लूईसीआना से मिसिसिपी  से गुज़रते हुए अलाबामा तक के सफर में कई कठिनाईओं का सामना करना पड़ा और इन्ही परिस्थितियों में दो भिन्न श्रेणी के लोग मिले और उनमें  दोस्ती हो गयी ।

मैं फिल्म देखते हुए दो बातें सोच रहा था।

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