पुलवामा, और भाजपा की नफरत और युद्ध की राजनीति – पांच और सवाल

[इस विषय पर हमारा ३/३ लेख मोली मुखर्जी गुप्ता, साउथैम्पटन, यू.के.] द्वारा अनुवादित

प्रश्न 6 – क्या इस युद्ध के बाद कश्मीर समस्या का स्थायी समाधान हो जायेगा? अमेरिका और सऊदी अरब के देश – जिन्होंने हमेशा पाकिस्तान को हथियार और पैसा मुहैया कराया है, और आज भी लगातार कर रहे हैं (सऊदी क्राउन प्रिंस जिन्होंने अभी हाल ही में पाकिस्तान और भारत की यात्रा की, और तोहफे में पाकिस्तान को बड़ी रकम का वादा किया) – क्या उन्हें इन दोनों देशों के बीच शांति स्तापना की प्रक्रिया में शामिल किया जायेगा? मैं ऐसा इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि, अब वक्त आ गया है कश्मीर के समस्या का स्थायी रूप से कोई हल निकला जाये।

प्रश्न 7 – क्या दुनिया के मानचित्र से पाकिस्तान का नामोनिशान मिटा देने से आतंकवाद और कश्मीर समस्या का स्थायी समाधान निकल आएगा? तर्क के खातिर मान लेते हैं, हमने पाकिस्तान को पूरी तरह से नष्ट कर दिया, जैसा की बीजेपी और आरएसएस हमेशा से चाहते आये हैं। लेकिन ऐसा करने से क्या केंद्र सरकार सीमापार से हो रहे आतंकवाद को रोकने में समर्थ हो पायेगी? क्या वे भारत और भारत के लोगों पर और ज़्यादा हमले करने की कोशिश नहीं करेंगे? क्या मौजूदा सरकार इस बात की गारंटी लेगी?

प्रश्न 8 – पड़ोसी मुल्क से युद्ध और वहां के आतंकी शिविरों का सफाया करने से क्या हमारी अपनी मुश्किलें हल हो जाएँगी? हमारे देश से आर्थिक संकट, भ्रष्टाचार, पर्यावरण और जलवायु संकट, कृषि एवं बेरोजगारी की समस्याएँ सदा के लिए मिट जाएँगी? क्या मोदी सरकार राफेल डील, नीरव मोदी, विजय माल्या और अम्बानी भाइयों के खिलाफ भी ऐसी ही तत्परता से कोई ठोस कदम उठाएगी?

प्रश्न 9- बीजेपी की सरकार की असली मंशा क्या है? क्या वे देश के सभी सरकारी बैंकों, उद्योगों, बीमा, शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवहन का पूरी तरह से निजीकरण करने के फ़िराक में है? आजकल जहाँ १ डॉलर ७२ रुपये हो गया है, वही मौजूदा सरकार में इसे कम करने की कोई मंशा नहीं दिख रही है। बल्कि इसके विपरीत ऐसा प्रतीत हो रहा है जैसे आईएमएफ और विश्व बैंक के निर्देश पर १ डॉलर बढ़कर ८० या ८५ रुपये भी हो सकते है। जिसके परिणामस्वरुप हमारे रोज़मर्रा के सामान जैसे की तेल, परिवहन, चिकित्सा, शिक्षा आदि क्षेत्र में बेतहाशा वृद्धि होना तय है।

प्रश्न 10 – क्या भाजपा और आरएसएस इस वर्ष के चुनाव में भारत के संविधान को अपने हिसाब से बदलने में कामयाब हो पाएंगे? ऐसा करने से राजनीतिक विरोध को सार्वजनिक रूप से राष्ट्रद्रोह घोषित करना आसान हो जायेगा और उन विरोधियों को देशद्रोह के लिए संवैधानिक रूप से दंडित करना भी मुश्किल नहीं होगा।

मुझे जवाब का इंतज़ार रहेगा। अपने सवालों से मैं आप सभी को ऐसे ही प्रोत्साहित करता रहूँगा।

भारत माता की जय। जय हिन्द। वन्दे मातरम ।

पार्थो बनर्जी.

ब्रुकलिन, न्यू यॉर्क

पुलवामा, आतंकवाद के खिलाफ लड़ी गयी जंग, और नफरत की राजनीति – २

https://humanitycollege.org/2019/03/11/pulwama-and-the-war-on-terror-part-1/ — इस आर्टिकल के बाद दूसरा नंबर।

हमारा बदला पूरा हो जाए तो मैं कुछ सवाल आप सबसे पूछना चाहूंगा। मुझे उम्मीद है आप सब मुझे वो मौका देंगे।

मैं जिन बातों को आपके सामने लाना चाहता हूँ, वो इस प्रकार है:

प्रश्न 1 – जहाँ हर वक्त इतनी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था होती हैं, जहाँ एक परिंदा भी पर नहीं मार सकती, उस मैक्सिमम सेक्युयरिटी ज़ोन में आतंकवादी बम से भरा हुआ ट्रक लेकर आते हैं और धमाका करके अत्याधुनिक हथियारों से लैस हमारे ४० से ज़्यादा सैनिकों को मार डालते हैं। पर कैसे? सवाल यह है जहाँ कुछएक किलोमीटर के दायरे पे और भी सेना छावनियां है, वहां ३०० किलो आईइडी लेकर जैश के आंकवादी उस संवेदनशील छेत्र में घुसे कैसे? क्या इसकी कोई निष्पक्ष जांच होगी? इस भयानक मौत के लिए कौन जिम्मेदार है? इन बेकसूर सैनिकों के नरसंहार के लिए जो भी जिम्मेदार है, क्या उसकी पहचान की जाएगी?

प्रश्न 2 – क्या अब तक किसी जनरल, कर्नल, मंत्री या सुरक्षा अधिकारी इस लापरवाही के लिए खुद को दोषी मानते हुए इस्तीफा दिया है? नहीं ना। हांलाकि, हम जानते है अगर बैंक में कभी डाका पड़ जाये और वहां की तिजोरी लूट ली जाये तो वहां के शाखा प्रबंधक को इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है, लापरवाही के लिए उनकी नौकरी भी जा सकती है। कॉर्पोरेट दुनिया में भी विफलता की जिम्मेदारी लेनी पड़ती है। और फिर हमारी सरकार तो अमेरिका के कॉर्पोरेट मॉडल पर ही चल रही है। फिर यहाँ उनका यह नियम लागू क्यों नहीं होगा?

प्रश्न 3 – सुनने में आया है की खुफिया विभाग को इस हमले की खबर पहले से थी। फिर भी, सुरक्षा विभाग से इतनी बड़ी खामी कैसे रह गई? क्या किसी ने इसे जानबूझकर, सुनिश्चित तरीके से होने दिया? अगर सच में ऐसा है तो वे कौन लोग है? क्या उन्हें ढूंढ निकलना इतना मुश्किल है?

प्रश्न 4 – चलिए मान लेते हैं भारतीय सेना और वायु सेना एकसाथ मिलकर पाकिस्तान में घुस कर उनके सभी आतंकवादी ठिकानों पर बम बरसाकर उन्हें नष्ट कर देती है, जो अंतर्राष्ट्रीय कानून के नज़रिए से देखा जाये तो गलत है। क्यूँकि कोई भी देश किसी दूसरे देश में अंतरार्ष्ट्रीय स्तर पर अनुमति के बगैर नहीं घुस सकता, एकतरफा बमबारी नहीं कर सकता और उसकी संप्रभुता को नष्ट नहीं कर सकता। ऐसा करना अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर असंवैधानिक और गैर कानूनी होगा। हालाँकि, पूरे विश्व के विरोध को नज़रअंदाज़ करके किसी दूसरे देश में बमबारी और नरसंहार कैसे किया जाये यह तो अमेरिका ने ही हमें सिखाया है। इसका सबसे बड़ा उदहारण है इराक, वियतनाम और सीरिया। फिर तो हम भी दो चार ऐसे छोटे -मोटे हमले कर ही सकते है। लेकिन सवाल ये उठता है की क्या केंद्र सरकार हमारे देश की भविष्य के सुरक्षा सुनिश्चित कर पायेगी? ऐसा कदम उठाने पर भविष्य में कोई दूसरा आतंकवादी हमला नहीं होने का आश्वासन क्या मोदी सरकार हमें दे पायेगी?

प्रश्न 5 – आज के इस दौर में जहाँ हम अपनी रोज़मर्रा के ज़िन्दगी में छोटी से छोटी चीज़ें भी बिना गारंटी के नहीं लेते, चाहे वो सिलाई मशीन हो या गाड़ी; वहीं हम बिना गारंटी के बमबारी और उसके पीछे होने वाले रुपये की बर्बादी को कैसे खरीदेंगे?

[Our second Hindi article on India-Pakistan terror, politics of hate and violence, and some important questions on the eve of national elections. Hope you read and share. This is part 2 of a long article I wrote. Moly Mukherjee Gupta from Southampton, U.K. translated into Hindi.]


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