NRC, और RSS-BJP का क्रूर खेल। कीमत कौन देगा?

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हां, अमित शाह ने बांग्लादेशी अप्रवासियों को कई बार “दीमक” कहा है (याने चीटि जो सबकुछ चाटकर खा जाते हैं)। जिस तरह अमेरिका में ट्रम्प ने मैक्सिकन प्रवासियों को “बलात्कारी और हत्यारे” कहकर संबोधित किया।

भारत के मोदी-शाह-योगी और अमेरिका में ट्रम्प और उनकी रिपब्लिकन पार्टी के साथ बीजेपी पार्टी में क्या समानता है! अभी दोनों पार्टियों का चौंका देने वाला दबदबा है – भाजपा में हिंदू शब्द का जो दबदबा है, रिपब्लिकन पार्टी में वही G.O.P. या ने सफेद क्रिस्टियन लोगों का महत्व है। स्टीव मिलर, ट्रम्प के अप्रवासी-नफरत करने वालों में प्रमुख व्यक्ति हैं। शायद, जैसे भारत में अमित शाह।

अजीबोगरीब ढंग से, कई और समानताएँ हैं। रिपब्लिकन पार्टी के पीछे बड़ी हिंसक ताकतें हैं – नेशनल राइफल एसोसिएशन (एनआरए) और कु क्लक्स क्लान (केकेके) जैसे चरमपंथी संगठन। ऐसे ही रास्ट्रीय स्वयंसेवक संघ(आर.एस.एस)भाजपा के पीछे।

नफरत के ताकत पर हिंसा इन दोनों पार्टियों का अंदरूनी जोश या ताकत है | मैं पूरा यकीन से ये इसलिए कह सकता हूँ, क्योंकि मे १९६२ से १९७९ तक आर.एस.एस का सदस्य रह चुका हूँ |

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गोएबल्स कहा करता था, अगर एक झूठ का हजार बार लोगों को बताया जाता है, तो लोग धीरे-धीरे उसी रिपोर्ट को सच मान लेते हैं। भारत में या यहाँ अमेरिका में, मीडिया ने वही गोएबल्सियन मॉडल का पालन करना शुरू कर दिया है।और आबाम को पूरी तरह से वही झुट घेर लिया है। समझना तो दूर, किसी को इस बात का भनक भी नही लग सकता कि देशभक्ति ही वास्तव में लोकतंत्र का विरोध है जो कि पुरी तरह से जल्द है। और जो ही इसका खिलाफ आवाज करे, उनको लगा दो देशद्रोही तकमा, और मौका मिलने पर इसे खत्म करने के लिए शारीरिक या मानसिक रूप से गन्धी खेल खेला जा रहा है। गौरी लंकेश, कलबुर्गी, पनेसर हो या, अमर्त्य सेन, अरुंधति रॉय, मेधा पाटेकर, नसीरुद्दीन शाह।

NRC इसी खेल का एक अध्याय है। कश्मीर, पुलवामा के बाद अब NRC का यह घिनोना खेल। बिश लाख निर्दोष लोगों का जीवन बर्बाद हो रहा है। अवसाद से लेकर मानसिक बीमारी और यहां तक ​​कि आत्महत्या पर मजबूर हो रहा हैं लोग। जिन्दगी भर भारत में रहने के बाद – बंगाली हिंदू या मुस्लिम परिवार – अब बिना किसी स्थिति के है। यानी वे भारत के नागरिक नहीं हैं। किसी देश से नहीं। इसलिए, वे निराशा, गरीबी, बीमारी, शोक, भुखमरी, चिड़चिड़ापन की से उथलपुतल हो रहे हैं।

यह उन्नीस-बीस लाख मुसलमान और बंगाली आर्थिक रूप से हो या शारीरिक रूप से कहाँ जाएंगे? या तो वे मजबुरन छुप जायेंगे, या फिर वो जेल मे जबरदस्ती कयेद किये जायेंगे नही तो मजबुरन मर जायेंगे मिट जायेंगे । जैसे ट्रम्पयुग का अमेरिकी मॉडल, वैसा ही भारत में शाह-योगी युग का माँडल ~ जहां निजी जेलों का भी निर्माण किया जायेगा । और कयेद किये गये लोग ही इन पूँजीवादी लोगोंका व्यवसायों की भरपाई करेगा (जेसा ऊन जमाने मे बन्धुया मजदुर किया करते थे) | जितने ज्यादा कैदी, उतना ज्यादा मुनाफा। संयुक्त राज्य अमेरिका में जियो और सीसीसी – ये दो निजी जेल निगम खुले बाजार मे अपने शेयर का ट्रानजाकशन करते हैं। सुनकर चौंक गए ना? फिर खुद ही गूगल के जरिये इस बात कि पुष्टि कर लीजिए ।

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फिर….. फिर क्या…..

बही रोहिंग्या लोगो की ढंग से, सभी शरणार्थियों के रूप में होगा | उनमें से अनगिनत लाखों बांग्लादेश में दिखाई देंगे, या पश्चिम बंगाल मे ….

लोगो को शरणार्थी बनाने का ये साजिश ~ बन्धुआ मजदूर बनाने का ही एकाएक हिस्सा हैं, कंहा हो, इससे कोई फर्क नही पड़ता !! वह भी साजिश का हिस्सा है।

अभी, बांग्लादेश और भारत ~ इन दोनो देखो का मुद्रा का मान अब एक ही बन चुका हैं | भारत का ईकनमि (अर्थव्यवस्था) डूब चुका हैं, अब बांग्लादेश और पाकिस्तान का ईकनमि (अर्थव्यवस्था) भी अगर साथ साथ ही डूबे तो भारत का वर्तमान शासकों का राजनीतिक फायदा होगा |

खेल बहुत बड़ा है सभी खिलाड़ियों और उनकी रणनीतियों को अच्छी तरह से समझने की जरूरत है। बल्लेबाज, गेंदबाज, क्षेत्ररक्षक, विकेटकीपर, कोच।

इसके के बाद, यही खेल का उपोत्पाद होगा ~ खौफ और हिंसा का शर्मनाक आतंक ।
जितना दर्दनाक ढंग से लोगों को दबाव और कुचला जायेगी , उसकी प्रतिक्रिया मे तब उतनी ही अधिक नफरत और अधिक उत्पीड़न होगी।

अधिक गरीबी, अधिक भूख, अधिक निराशा, अंध कट्टरता। रुड़ीबादी के अंन्ध नजरों मे होगा ~ हिंदू और मुसलमान।

लेख के शीर्षक में मैंने पूछा, “कीमत का भुगतान कौन करेगा?”

अब आप उस प्रश्न का उत्तर दें।

मैं नहीं दूंगा।

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Translation from English by Gautam Basu.

Photo courtesy: For non-profit, educational use: The Hindu.


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